Sunday, May 1, 2022

मायूसी

 ये बौनों-पौनों के विराट हो रहे साए

लहूलुहान देवता प्रकाश का बेदम

दरख़्त रो रहे हैं, रो रहे पंछी

हुआ-हुआ का शोर पास आ रहा मेरे


हंस रही फौज लकड़बग्घों की

'गुलों में रंग भरे' फैज़ गा रहा कोई

गिद्ध आ बैठे है आकर के मेरे सिरहाने

पर मुझे लगता है कि मैं मरा नहीं हूं अभी

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