ये बौनों-पौनों के विराट हो रहे साए
लहूलुहान देवता प्रकाश का बेदम
दरख़्त रो रहे हैं, रो रहे पंछी
हुआ-हुआ का शोर पास आ रहा मेरे
हंस रही फौज लकड़बग्घों की
'गुलों में रंग भरे' फैज़ गा रहा कोई
गिद्ध आ बैठे है आकर के मेरे सिरहाने
पर मुझे लगता है कि मैं मरा नहीं हूं अभी
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