जी करता है मेरा मां मैं भगत सिंह बन जाऊं
बहरे कान लगें फिर सुनने ऐसी धूम मचाऊं
या फिर गांधी बनकर मां मैं थामूं सच की लाठी
धर्म न छोड़ूं खा लूं गोली और अमर हो जाऊं
अकबर भी था अपना पुरखा कहो वही बन जाऊं
हिंदू-मुस्लिम खत्म करूं फिर मजहब नया बनाऊं
छोड़ो ये सब बेटा बस तू इतना प्यार लुटाना
मैं तेरी मां दुनिया भर की भारत मां बन जाऊं
–अजय शुक्ल
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