Monday, May 2, 2022

शहीदे आज़म भगत सिंह

 शहीदे आज़म भगत सिंह

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"क्यों रे भगत, यह क्या हुलिया बना रखा है...पीली पगड़ी और हाथ में कट्टा!? 


"मेरा रंग दे बसंती चोला माए रंग दे बसंती चोला...जिस चोले को पहन शिवाजी..."


"तो बेरोजगारी में बहुरूपिया का पेशा अपना लिया है? पकौड़ा फैक्ट्री का क्या हुआ?"


"अंकल, जैसे उम्र ने आपके बाल चर लिए, लगता है वैसे ही राष्ट्रद्रोह की भावना ने आपकी अकल को चर लिया है। हो तो चाचा लेकिन जी करता है कि आपको रावी के पार भिजवा दूं।"


"क्यों गुस्सा होते हो बालक? मैंने कौन सा पाप कर दिया है?"


"इससे बड़ा और कौन सा पाप होगा कि जिस भगत सिंह ने आपकी आज़ादी के लिए फांसी का फंदा चूमा, उसी शहीदे आज़म का बड्डे आपको याद नहीं!... राष्ट्रद्रोही हो आप। गद्दार। खुशकिस्मत हो कि हम लोग सहिष्णु हैं। अफगानिस्तान में होते तो तालिबान कुफ्र के आरोप में मारकर क्रेन से लटका देते।"


"आयम रियली सॉरी...लेकिन यह पगड़ी और कट्टा!?"


"हमने भगत सिंह बनने का फैसला किया है...भगत सिंह बसंती पागी बांधते थे कि नहीं? वे पिस्तौल रखते थे या नहीं?...हमने देश को गुलामी से मुक्त करने का संकल्प लिया है.."


"गुलामी? किससे आज़ादी? अच्छा वह आज़ादी जो जेएनयू वाले कन्हैया कुमार टाइप लौंडे चाहते हैं? अर्बन नक्सल बनोगे? अल्ट्रा लेफ्टिस्ट? ओके..भगत सिंह भी आखिर थे तो लेफ्टिस्ट ही?"


"चच्चू, क्या बकते हो? भगत सिंह और कम्युनिस्ट? बिलकुल नहीं। वॉट्सएप में नहीं हो क्या? भगत सिंह राष्ट्रवादी थे...बिलकुल हमारी तरह। आप नहीं समझोगे। समझेंगी आपकी संतानें जब सौ या पचास साल में वे अल्पसंख्यक हो जाएंगी।"


"लेकिन क्या केवल कट्टा थाम कर भगत सिंह बना जा सकता है?"


"और क्या था भगत सिंह के पास?"


"बहुत कुछ। अगर वाकई भगत सिंह बनना चाहते हो तो बताऊं..."


"बताओ, मैं सचमुच बनना चाहता हूं।"


"तो सुनो। भगत सिंह मातृभाषा पंजाबी के अलावा अंग्रेज़ी, उर्दू और हिंदी के विद्वान थे। वे नास्तिक होने के बावजूद संस्कृत भी जानते थे। वे बांग्ला भाषा में भी दखल रखते थे। और, अपने जीवन के अंतिम दिनों में फारसी सीखने में लगे थे।"


"बाप रे बाप! मगर उन्होंने अंग्रेज़ी और उर्दू क्यों सीखी? ये तो गुलामी की निशानियां हैं।"


"ऐसा? चलो, यह बताओ कि तुम्हें कितनी भाषाएं आती हैं?"


"केवल हिंदी, दसवीं तक पढ़ी है"


"चलो। आगे सुनो। भगत सिंह  भारत और विश्व इतिहास, दर्शन और राजनीति विज्ञान के उच्च कोटि के स्कॉलर थे।"


"हम तो वॉट्सएप यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। हमको ऐसा कुछ नहीं पढ़ाया गया।"


"अब आगे सुनो। भगत सिंह बहुत पढ़ाकू थे। उनके प्रिय लेखकों में चार्ल्स डिकेन्स, गोर्की, ऑस्कर वाइल्ड, अप्टन सिंक्लेयर, लेनॉर्ड एंड्रयू, हॉल केन और विक्टर ह्यूगो जैसे दिग्गज शामिल थे। इनमें किसी का नाम सुना है?"


"एक का भी नहीं।"


"तो, और सुनो। एक अनुमान के मुताबिक अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान, 1913 और 21 के बीच उन्होंने 50 किताबें पढ़ डाली थीं। और, कॉलेज में दाखिले के बाद कोई 300 किताबें वे चट कर गए थे। सबसे अधिक पढ़ाई तो उन्होंने 716 दिन की कैद में की। फांसी के वक्त तक वे जेल के अंदर 300 किताबें खत्म कर डाली थीं। जब उनको फांसी के लिए बुलावा आया, उस समय भी वे लेनिन की एक किताब पढ़ रहे थे। किताब का नाम था स्टेट एंड रिवोल्यूशन।"


"दादा रे दादा! भगत सिंह बनना तो बड़ा कठिन है!!"


"फिर!?"


"चच्चा, माफ करो। मैं न बन पाऊंगा भगत सिंह। इससे तो वही अच्छा है..."


"क्या?"


"राम नाम जपना, पराया माल अपना"


"एक बात और। भगत को मुहब्बत पर भी यकीन था।"


"ये तो सबसे कठिन है। वॉट्सएप यूनिवर्सिटी में तो सिर्फ नफरत की ट्रेनिंग मिली है।"


(सार: पिस्तौल से भगत सिंह बनते तो देश में आज लाखों भगत सिंह घूम रहे होते)





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