Sunday, May 15, 2022

ग़ज़ल

          आंख मीचो मत

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आंख मीचो मत अंधेरा और गहरा हो चलेगा

एक शोले से घना जंगल सुनहरा हो चलेगा


सीख लो गूंगे की मानिंद अब इशारों की ज़बां

ढाई आखर बोलने पर कल से पहरा हो चलेगा


नहर लाओ काटकर बरबाद न हो फसल ये

अश्क से सींचोगे तो ये खेत सहरा हो चलेगा


भूल कर बन्दर के हाथों जो थमाया उस्तरा

वो हजामत होगी तेरी लाल चेहरा हो चलेगा

                             






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