Wednesday, April 23, 2025

गाओ गाना

 न क़द है न काठी लिए हाथ लाठी

उठाए अलम हैं बहकते क़दम हैं

नहीं कुछ भी पल्ले हैं पूरे निठल्ले

गला फाड़कर पर दिखाते हैं कल्ले 

कभी अल्ला बोलें कभी सिया रामा 

वो धोती पहनते वो ऊंचा पजामा 

ये जॉम्बी नहीं हैं ये आदम के बच्चे

कोशिश करो तो बनेंगे ये अच्छे

इन्हें दे दो पोथी इन्हें दे दो रोटी 

बनाओ नहीं इनको चौसर की गोटी

न इनसे ख़ुदाया खुदाई कराओ

नहीं इनको नफ़रत का काढ़ा पिलाओ

चलो फिर से हम एक गांधी को जगाएं

लड़ें सच की खातिर अंधेरा भगाएं

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