Sunday, April 13, 2025

बेतुकी बातें H

 बेतुकी बातें

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क्या लिखूं? कई दिन से यही सोच सोच कर परेशान हूं। दिल्ली में ज्वलनशील नोटों पर लिखूं? लेकिन मैं तो यह भी नहीं जानता कि आत्मदाह करने वाले नोट चूरन वाले थे या आईएसआई निर्मित। यह भी तो हो सकता है कि नोटों की होली का वीडियो AI ने बनाया हो! उम्मीद है कि करेंसी नोटों से निकलने वाली miasma की फोरेंसिक जांच से सच का पता चल जाएगा। अब आप पूछेंगे कि यह मियाज़्मा क्या होता है? अगर मैं कहूं कि इसे समझने के लिए अंग्रेजी पढ़िए तो आप मुझे देशद्रोही कहने लगेंगे। चलिए मत पढ़िए। हालांकि यह अर्थ नहीं लेकिन आप मियाज़्मा को चिरायंध समझ लीजिए। चिरायंध का अर्थ न पूछिएगा। समझाऊंगा तो चिरायंध फैल जाएगी। इस मुहावरे का मतलब? इसे समझने के लिए आपको मेरे शहर कानपुर में रहना होगा। कानपुर वह शहर है जिसने अपने सपूत गणेश शंकर विद्यार्थी की आज के ही दिन हत्या की थी। हर साल की तरह इस बार भी यह शहर आज बलिदान दिवस पर बुक्का फाड़ कर हर साल रो रहा है। न न न! यह रोउनों का शहर नहीं है। सुबह यह शहर बैक टू स्क्वॉयर वन की अधोगति को प्राप्त कर लेगा। असली श्रद्धांजलि कानपुर तब देता है जब कोई दंगा होता है। मौका मिलये ही जम कर पार्टिसिपेट करता है। सन 84 हो या 92/93 का साल। दंगे सेकुलर रहे हैं। मैंने 84 में दंगे के बाद एक सरदार जी के घर नया टीवी सेट देखा था।


मैं इस उच्चस्तरीय चिंतन में लगा ही था कि मेरे अखंड मित्र झम्मन और सिरम्मन आ धमके। मैं नोटों के चिंतन से उबर चुका था। लेकिन ये दोनों उसी में डूबे थे। झम्मन नोटों को लेकर क्रांति की बातें कर रहा था क्योंकि उसने लाल शर्ट पहन रखी थी। सिरम्मन नोटों को लेकर धर्म और ज्योतिष की बातें कर रहा था क्योंकि उसने ऑरेंज कलर का कुर्ता पहन रखा था। 


चाय पीने और सनकी का पाउच फांकने के बाद सिरम्मन नोट जलने की ज्योतिषीय व्याख्या में जुट गए। मुझे आश्चर्य हुआ कि इस पोंगा पंडित को ज्योतिष का ज्ञान कैसे हो गया। सो मैंने पूछ लिया, "क्यों पंडत आज का पंचांग पता है?"


इनकार में सर हिलाते हुए वह बोला, " आय डोनो, यू नो आय वेंट टु अ मिशनरी स्कूल।"


"फिर तू ज्ञान पांड़े काहे बन रहा है?"


वह हंसने लगा। बोला, "आय कंसल्टेड विद स्वामी ग्रोकानंद सरस्वती..."


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ग्रोकानंद सरस्वती ने क्या कहा? यह जानने का मन हो तो सूचित करें।

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