Sunday, April 13, 2025

नफ़रतानंद 4

 कनपुरिया लंतरानियाँ: स्वामी नफरतानंद(4)

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(यह पूरी कथा काल्पनिक यानी सरासर गप्प है। इसके किसी भी पात्र का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेनादेना नहीं। संयोग की बात दीगर है)

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नाना की मौत को जलेबियों से सेलिब्रेट करने की घटना को सब लोग बालसुलभ नादानी मान कर भूलने लगे। नफरती भी नेशनल ज्योग्राफिक और डिस्कवरी चैनलों के जरिए रक्तपान में मशगूल रहने लगा।  तभी एक दिन उसे अपने दांतों में दर्द उमड़ आया। मामी ने उसे लौंग के तेल की फुरेहरी दे दी लेकिन दर्द घटने की बजाय और बढ़ गया। शाम को मामा जी डेंटिस्ट के पास ले गए।


"किस दांत में दर्द है" डेंटिस्ट ने पूछा।


"सारे के सारे दांतों में" नफरती ने दर्द से कराहते हुए जवाब दिया।


डॉक्टर ने मुंह खुलवाकर एकएक दांत की जांच की। उसे कुछ नहीं मिला। 

हैरान होकर डॉक्टर ने कहा, "इसके दांतों में तो कोई रोग नहीं। न कैरीज़ है, न जिनजिवाइटिस। न ही मसूढ़े सूजे हैं और न कोई ब्लीडिंग है। कोई दांत भी नहीं हिल रहा है।"


"फिर!?" मामा जी ने पूछा।


"मैं खुद नहीं समझ पा रहा" डेंटिस्ट ने कहा, "ऐसा करता हूं, इसे पेनकिलर्स  दे देता हूं। सुबह किसी अच्छे फिजिशियन को दिखा लीजिए।"


सुबह नफरती को लखनऊ के मशहूर डॉक्टर भार्गव को दिखाया गया। लेकिन यह बड़ा डॉक्टर भी बीमारी डायग्नोज़ करने में नाकाम रहा। 

"इट कुड बी ए केस ऑफ़ इमोशनल ओवरले" डॉक्टर भार्गव ने कहा, "ऐसा कीजिए, आप इसे नूर मंज़िल में दिखा लीजिए।"


नूर मंज़िल। मायने लखनऊ का प्रसिद्ध मनोरोग अस्पताल। 


दूसरे दिन नफरती को मनोरोग चिकित्सालय ले जाया गया। आधेआधे घंटे के दो सेशन के बाद सायकायट्री के  डॉक्टर ने नफरती के सुख के स्रोत और दर्द का कारण समझ लिया।


"He is suffering with Schadenfreude" डॉक्टर ने कहा।


"आंय" मामा जी चौंक पड़े, "यो का होत है, हमार लरिका बचि तौ जई?"


"परेशान न हों, इसका बाल भी बांका नहीं होगा" डॉक्टर ने एश्योर करते हुए कहा, "लेकिन इसके हाथ से किसी दूसरे की जान जा सकती है। मामा जी आपकी भी।"


मामा जी खुद को कंस जैसा महसूस कर रहे थे। बहरहाल, खुद को संयत करते हुए उन्होंने बीमारी के बारे में पूछा।

(कुछ technical glitch के कारण पूरा एपिसोड पेस्ट नहीं हो पा रहा। बाकी हिस्सा पांचवें एपिसोड के नाम से तुरंत डाल रहा हूं)

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