नीलम और पन्ना का सूप
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बहुत पहले चीन में एक राजा हुआ करता था। एक बार दुश्मनों ने उस पर हमला कर दिया। राजा हार गया और बुरी तरह घायल होने के बाद वह मैदान से भाग निकला।
लस्तपस्त होकर वह जंगल की शरण में पहुंचा और एक पेड़ के नीचे लेट गया। थोड़ी देर बाद भिखारियों का समूह वहां से गुजरा जो पास के गांवों से भीख मांगकर आ रहा था। उन्होंने घायल राजा को देखा तो उसे अपनी झोपड़ी में ले गए। उसके जख्मों पर जड़ी बूटियों का लेप लगाने के बाद उसे पीने के लिए सूप दिया। दो दिन के भूखे राजा को सूप बहुत अच्छा लगा। उसने और मांगा तो भिखारियों ने उसे झिड़क कर कहा, यह सूप दोबारा नहीं मिलता। बहुत महंगा है। इसमें पन्ना और नीलम का तड़का लगाया गया है।
राजा ठीक होने लगा। वह रोज सूप की मांग करता लेकिन भिखारी मना कर देते। कहते, भीख में पन्ना नीलम दोबारा मिलेंगे तो फिर पिलाएंगे। एक दिन राजा स्वस्थ होकर लौट गया लेकिन वह सूप उसे दोबारा नहीं मिला।
कालांतर में उसने अपना खोया राज्य फिर प्राप्त कर लिया। लेकिन उसे भिखारियों के पिलाए सूप की याद नहीं भूली। एक दिन उसने अपने चीफ खानसामा को बुलाया और कहा कि नीलम और पन्ना के तड़के वाला सूप बनाओ।
खानसामा ने सूप बनाया। नीलम और पन्ने का तड़का लगाया लेकिन राजा ने उसे सूंघते ही खारिज कर दिया। बोला, उसमें वह सुगंध ही नहीं है।
उसने मंत्री को बुलाया और उसे सूप के बारे में बताया। मंत्री ने रियासत में डुग्गी पिटवा दी। ऐलान किया गया कि जो आदमी राजा का मनपसंद नीलम पन्ना का सूप बनाएगा, उसे दस गांवों की जागीर दी जाएगी।
कई बावर्ची आए। लेकिन कोई राजा को संतुष्ट नहीं कर पाया। एक दिन शहर में भीख मांगते उन भिखारियों ने भी वह ऐलान सुना। उन्होंने नीलम और पन्ने के सूप की बात सुनी तो वे आपस में हंस पड़े। उन्हें लगा कि हो न हो, यह वही आदमी है जिसने हमारा सूप पिया था। पुष्टि करने में देर न लगी। चौराहे पर राजा की मूर्ति लगी थी। उन्हें पहचानने में देर न लगी।
उन्होंने मंत्री के पास जाकर अपना दावा पेश कर दिया। मंत्री ने चीफ खानसामे को बुलाकर कहा, ये लोग सूप बनाएंगे। इन्हें हर वह चीज मुहैया कराई जाए जो ये चाहें।
भिखारियों ने खानसामे को सब्जियों और मसालों की सूची दी। "और नीलम पन्ना?" खानसामे ने पूछा। भिखारी बोले, उनकी चिंता न करो। सारे रत्न हमारे पास हैं।
थोड़ी देर में सब्जियां और मसाले आ गए। सब्जियां देखकर भिखारियों ने नाक भौं सिकोड़ ली। बोले, "ऐसी सब्जी से नीलम पन्ना का सूप नहीं बनता ... छोड़ो, अब हम सब्जी लाएंगे।"
वे सब्जी मंडी गए और सबसे सड़ी गली सब्जी और घोड़े का सड़ा गोश्त खरीद लाए। इसके बाद सूप बना। उसकी बदबू से महल गंधाने लगा। सूप राजा को पेश हुआ। उसने लंबी सांस लेकर सूप सूंघा और खानसामे को बुलाकर बोला, "देखो ऐसा होता है नीलम पन्ने का सूप। इन लोगों से सीख लो। इन्हें बार बार न बुलाना पड़े।
पूरा महल सूप का सत्य जानता था। लेकिन सबने हंसी रोक रखी थी। लेकिन मंत्री अपनी मुस्कान रोक नहीं पाया। राजा तमतमा गया, "क्यों हंसते हो जी?"
मंत्री ने अपना धर्म निभाते हुए आगाह किया, "महाराज इसमें थोड़ी बदबू नहीं आ रही?"
"मूर्ख मंत्री, यही तो सूप की खुसूसियत है। बिलकुल जन्नती सूप है।"
राजा सूप पीने लगा। फिर खानसामे को बुलाकर हुक्म दिया,"एक कटोरा मंत्री जी को भी।"
मंत्री ने एक चम्मच मुंह में डाला। उसे उबकाई आने लगी। राजा ठहाका मारकर हंसा और बोला, नीलम और पन्ना केवल राजा ही हजम कर सकता है।
(चीनी लोककथा)
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