सोचता हूं
अगर...दरख़्त खुद अपने फलों को बेचते
...अगर वरुण देवता खुद अपना पानी बेचते
... और पवन देव खुद हवा के सिलिंडर बेचते
...और अग्निदेव घंटे के हिसाब से चूल्हा जलाते
...अगर गाय खुद अपने दूध को बेचती
तो हम इन नेमतों का भुगतान
आख़िर किस तरह करते
किस मुद्रा में करते
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