Tuesday, December 31, 2024

Parody

 Parody 

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"वीर तुम बढ़े चलो"

(द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी से क्षमा याचना समेत)

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वीर तुम अड़े रहो! शूल से गड़े रहो!


प्रात हो कि रात हो, भीड़ तेरे साथ हो

बोल न सके कोई लट्ठ ले खड़े रहो

वीर तुम अड़े रहो! शूल से गड़े रहो!


एक ध्वज लिए हुए एक प्रण किए हुए

मूर्खता के लिए भाई बहन बाप के

प्राण तुम हरे रहो, वीर तुम लड़े रहो

 

पर अगर पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो

तुम झुका लो पूंछ को, तुम तुरंत भाग लो

बड़े की तरह छिपो दही में पड़े रहो

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