नुक़्ते पर लंतरानी
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सिरम्मन: इधर भी खुदा है उधर भी खुदा है...जिधर देखता हूं, खुदा ही खुदा है
झम्मन : अबे गधे की तरह क्या रेंक रहा है? बेसुरा। तूने भी दूध पी लिया क्या?
सिरम्मन: ज़बान को लगाम दे बुखारा के आलू, समरकंद की शकरकंदी...ताशकंद के पत्ते...पिटे हुए बादशाह...
झम्मन : अरे रे रेरे! यह क्या बोले जा रहा है.. आंय बांय सांय...
सिरम्मन: तो क्या बोलूं? सीधे सीधे कह दूं बाबर की औ..
झम्मन : रुक क्यों गए? बोल ही डालो। कोई कसर बाकी है क्या?
सिरम्मन: हां, बाकी है। यह तो केवल झांकी है।
झम्मन : देख सिरम्मन। हम और तुम पचास साल से दोस्त हैं। उससे पहले हमारे बाप-दादे दोस्त थे। और उससे पहले मेरे पुरखे चौहान थे। राजपूत। कभी शज़रा दिखाऊंगा अपना। तुम कहां उज़्बेकिस्तान और फरगना की बातें करने लगे?!
सिरम्मन: तुम तो सच्ची में गुस्सा हो गए, झम्मन। मैं तो मज़ाक कर रहा था। समझा करो। हमारी सांझी गंगा-जमनी तहजीब। इसी तहज़ीब के कारण ही तो मैं श्री राम चंद्र कृपालु भजमन की जगह खुदा खुदा संकीर्तन कर रहा था। और तुझे उसमें गधे का रेंकना महसूस हो रहा था...!
झम्मन : सॉरी भाई, सॉरी। अब तू गा। फिर से गा। मैं भी साथ ख़ुदा ख़ुदा गाऊंगा।
सिरम्मन: ओके। चल गाता हूं...इधर भी खुदा है उधर भी खुदा है...जिधर देखता हूं, खुदा ही खुदा है।
झम्मन : नहींSSS! बंद करो इसे...
सिरम्मन: अब क्या हुआ?
झम्मन : तू ख़ुदा का गलत उच्चारण कर रहा है। खुदा नहीं ख़ुदा।
सिरम्मन: वही तो कह रहा हूं। खुदा खुदा खुदा। खुदा की खुदाई। खूब मलाई खाई।
झम्मन : अरे तलफ़्फ़ुज़ के दुश्मन! ख़ुदा बोल। अपने खुदा में नुक्ता लगा।
सिरम्मन: नुक्ता क्या मैं नुक्ती लगा देता हूं। मिसरी लगा देता हूं। चलो, कढ़ाई की पूरी चाशनी उड़ेल देता हूं। लेकिन क्या इससे खुदा और खुदाई में मिठास आ जाएगी?
झम्मन : मैं हार गया। जब तू ख़ुदा ही नहीं समझता तो ख़ुदाई क्या समझेगा।
सिरम्मन: मत समझा। तुझे तेरा खुदा और खुदाई मुबारक। मुझे मेरी। मैं तो चला।
झम्मन : कहां?
सिरम्मन: खुदाई खिदमतगारों के पास।
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