Monday, October 31, 2022

गोबर की कीमत

 बेंगलुरु-1

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सारा बेंगलुरु नंदिनी (ब्रांड) गाय का दूध पीता है। लेकिन पूरे शहर में न तो एक भी नंदिनी टहलते मिली, न ही कोई नंदी। दिवाली के दिन तीन लीटर दूध लाया। टोंड। कीमत  37रुपए लीटर। लेकिन हम कनपुरियों को दिवाली की भोर दूध के साथ गोबर की भी ज़रूरत पड़ती है। गोवर्धन पूजा के लिए। 

सुबह सुबह आदेश हुआ: थोड़ा सा गोबर ले आना। कनपुरिया परेशान हो उठा। कानपुर होता तो यह बाएं हाथ का काम था। अपने ग्वाले जुल्फिकार अली भुट्टो (उसका सच में यही नाम है) से कह देता तो वह दो मुट्ठी क्या, पूरा पलवा भर के ले आता। या, खुद ही बाहर निकल पड़ता। कहीं भी गऊ माता की कृपा मिल जाती। बस देखना यह होता कि गोबर के नीचे कहीं शूकर की कृपा न पड़ी हो।

मगर यह देश का आधुनिकतम शहर था। क्या करूं? बेटे से कहा। बेटे ने एक खांटी लोकल कन्नडिगा को मेरी सहायता के लिए लगा दिया। 

"क्या बहुत दूर चलना पड़ेगा?" मैंने कन्नडिगा से पूछा। 

"देखता हूं।" उसने बंगलौरी हिंदी में जवाब दिया। 

हम चलने लगे। गांधी नगर से चलते चलते रेसकोर्स तक आ गए। वहां न तो गाय दिखी न गोबर। यहां तक कि रेसकोर्स के बावजूद घोड़े की लीद तक न थी।

कन्नडिगा ने वहां खड़े एक बूढ़े से पूछा,"यहां एक दूध बेचने वाला अपनी गाय लेकर खड़ा होता था..दिख नहीं रहा!"

बूढ़े ने कहा,"वह तो पांच साल से नहीं आ रहा।"


"चलिए, आगे देखते हैं" कन्नडिगा ने कहा। 

एक मील चलने के बाद भी कुछ नहीं मिला। इस बीच कुछ ऑटो वाले आ गए। एक ने गोबर दिलाने का भरोसा दिया। तीन सवा तीन किमी चलने के बाद मेरे पांव जवाब देने लगे थे। मैं ऑटो में बैठ गया। ऑटो वाले ने खूब बेंगलुरु घुमाया। अंततः एक रेलवे स्टेशन के पीछे की बस्ती में नंदिनी नहीं विलायती गऊ माता मिलीं। मैंने माता की कृपा को पॉलीथिन में समेटा और घर आ गया। ऑटो वाले ने  दो सौ रुपए लिए।

संक्षेप में कहूं तो एक लीटर दूध 37रुपए का और 200 ग्राम गोबर 200 रुपए का।

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