Saturday, November 13, 2010

आदमी और कुत्ता

आदमी और कुत्ता
भौंको, और तेज़ भौंको 
ओ आदमी के सबसे अच्छे दोस्त 
सुकून मिलता है
तुम्हारी आवाज़ सुनकर
झपट तो पड़ते हो
किसी भी उजबक पर तुम 
चबा तो लेते हो तुम 
किसी चोर का पाँव 
मैं तो इमली को आम कहते थक गया हूँ 
कसाई को माई-बाप कहते कट गया हूँ 
भौंको, और तेज़ भौंको...

Sunday, October 31, 2010

शुभ दीपावली

ओ माटी के दीप
जलो, फिर से
फ़ैलाने जोत
धरा पर
धरा तुम्हारी
तुम धरती के
आसमान का बूढा सूरज
खो जाये कब
महासत्य के अंधकार में
सत क्या है
तम है, या है
बोलो प्रकाश
रवि आता है
तम जाता है
या
तम को आता देख
भयातुर सूरज
पीठ दिखाता है
जब डाका पड़ गया
सुबह आता है थानेदार
चला जाता है
दिन ढलते
उन्हें मौका देके
फिर से
अजय शुक्ल

Thursday, October 28, 2010